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माँ शैलपुत्री की आरती

पहले दिन देवी शैलपुत्री जी की पूजा की जाती है । पर्वतराज हिमालय के घर जन्म लेने के कारण इन्हें शैल पुत्री कहा गया है । इन भगवती का वाहन बैल है । इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प है ।

शैलपुत्री मां बैल असवार । करें देवता जय जयकार ।।

शिव शंकर की प्रिय भवानी । तेरी महिमा किसी ने ना जानी ।।

पार्वती तू उमा कहलावे । जो तुझे सिमरे सो सुख पावे ।।

ऋद्धि सिद्धि परवान करे तू । दया करे धनवान करे तू ।।

सोमवार को शिव संग प्यारी । आरती तेरी जिसने उतारी ।।

उसकी सगरी आस बुझा दो । सगरे दुख तकलीफ मिटा दो ।।

घी का सुंदर दीप जला के । गोला गरी का भोग लगा के ।।

श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं । प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं ।।

जय गिरिराज किशोरी अंबे । शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे ।।

मनोकामना पूर्ण कर दो । भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो ।।

 

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